प्रेम गणपति की प्रेरक स्टोरी

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प्रेम गणपति की प्रेरक स्टोरी| Prem Ganapathy Success Story In Hindi

प्रेम गणपति एक साधारण इन्सान जिन्होंने भी हम-आप जैसे सपने देखे, और फिर पूरी मेहनत से उसे पूरा भी किया। वे इडली और डोसा के बारे में कुछ भी नही जानते थे लेकिन फिर भी उन्होंने स्टाल लगाने की ठानी।वे इडली, डोसा के बारे में जानने लगे, बनाने का प्रयास करने लगे और गलतिया करते गये। ऐसा करते-करते उनका डोसा मुंबई में प्रसिद्ध हो गया था और आने वाले पाच सालो में 1992 से लेकर 1997 तक उनके स्टाल को एक बड़ी सफलता मिली।

लेकिन सोचने वाली बात यह है की मुंबई में और भी बड़े-बड़े डोसा के रेस्टोरेंट होने के बावजूद भी एक छोटे से स्टाल को इतनी बड़ी सफलता कैसे मिली।

प्रेम के अनुसार ये उनका स्वास्थ विज्ञान, दोसे को सही तरीके से पेश करने की कला और ताज़े मसालों और सब्जियों का कमाल था। जिन्होंने लोगो का दिल जीत लिया था। और उनके स्टाल को बाकी रेस्टोरेंट से अलग बनाया था।

उन्होंने अपने स्टाल की सहायता से लाखो रुपये बचा कर रखे थे और पैसे कमाने के बाद घर जाने की बजाये उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम उठाया और मुंबई में ही वाशी के पास एक दुकान खोली जिसका नाम डोसा प्लाजा रखा गया।

लेकिन इसमें वे बुरी तरह से असफल हुए और तीन महीनो में ही उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। लेकिन प्रेम अपने साथ होने वाले इन हादसों से बहोत कुछ सिखा। उन्होंने अपने अनुभवों को अपने चाइनिस डोसा में प्रयोग किया, जिसे अच्छी सफलता मिलने लगी थी।

बाद में उन्हें धीरे-धीरे डोसा बनाने की आदत होती गयी और वे नए-नए तरह के डोसा बनाने लगे जिसमे अमेरिकन चोप्सी, सेजवान डोसा, पनीर चीली, स्प्रिंग रोल डोसा इत्यादि। इस तरह के बहोत बसे नए दोसो की खोज उन्होंने की। जो लोगो को काफी पसंद आने लगे थे। उनके मेनू में कुल 108 तरह के डोसा हैं जिन्होंने प्रेम को पूरी मुंबई में एक अलग ही पहचान दिलाई।

और सफल होने के बाद आगे बढ़ने का एक और मौका उनके जीवन में आया। एक बार उनके ही एक ग्राहक ने उनके सामने बॉम्बे के एक बड़े मॉल में अपना एक छोटा फ़ूड स्टोर लगाने का प्रस्ताव रखा। और इस समय दोबारा प्रेम की अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की इच्छा हुई, वे अपने व्यवसाय को और अधिक विकसित करना चाहते थे।

उनके सफल व्यवसाय में वे लोगो को अच्छी सर्विस के साथ ही बेहतर खाना भी देना चाहते थे। वे अपने दोसे को एक अलग पहचान दिलाना चाहते थे और अपना खुद का एक अलग ब्रांड बनाना चाहते थे।

इसी को मध्यनज़र रखते हुए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और अपने स्टोर के लोगो, मेनु कार्ड, वेटर ड्रेस इत्यादि में बदलाव किये।

अपने व्यवसाय में किये गये इस बदलाव ने उन्हें और ज्यादा सफलता दिलवाई। और आज डोसा प्लाजा की तक़रीबन 26 दुकाने है जिनमे से 5 तो कंपनी ने खुद खरीदी है।

जिसमे तक़रीबन 150 लोग काम करते है और इसका सालाना टर्नओवर तक़रीबन 5 करोड़ है। डोसा प्लाजा की सभी दुकाने एक दुसरे से जुडी हुई है जिसमे हर एक दूकान का अलग-अलग मैनेजर भी है। जिसमे वे अपने ग्राहकों अच्छी से अच्छी सेवा और अच्छे से अच्छा खाना देने की कोशिश करते रहते है।

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