सब्जी बेचने वाले नितिन गोडसे कैसे बने उद्योगपति? इनके संघर्ष का सफर

Spread the love
  • 23
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    23
    Shares
130 Views

सब्जी बेचने वाले नितिन गोडसे कैसे बने उद्योगपति? इनके संघर्ष का सफर

नितिन गोडसे गुजरात के अहमद नगर जिले के एक छोटे से गांव अकोला में पैदा हुए। जब वह छोटे थे तब उनका परिवार काफी गरीबी में जिंदगी गुजार रहा था। उस वक्त उनके पिता ‘सहकारी खरीरी विक्री संघ लिमिटेड’ में नौकरी करते थे। इससे उन्हें 400 रुपए प्रति माह का वेतन मिलता था।

गोडसे जब पढ़ाई कर रहे थे तो उन्हें घर के अलावा बाहर के काम भी करने पड़ते थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए कभी मजदूरी की तो कभी सब्जी बेची। नितिन गोडसे ने एक साक्षात्कार में खुद बताया है कि बचपन से ही वह अपना काम शुरू करना चाहते थे, लेकिन उनके पास इसके लिए पैसे नहीं थे।

नौकरी छोड़कर शुरू की पढ़ाई

ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद गोडसे ऑर्के इंडस्ट्रीज में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगे। एक साल बाद उन्होंने दूसरी कंपनी टेक्नोवा इमैजिंग सिस्टम में नौकरी की। लेकिन कुछ दिन बाद उन्हें अहसास हुआ बिना किसी प्रोफेशनल डिग्री के नौकरी में आगे बढ़ने के आसार नहीं है तो उन्होंने एमबीए करने की ठानी जिससे कि वह किसी कंपनी में मैनेजर बन सकें।

इसके बाद उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और 1994-96 में एमबीए की पढ़ाई पूरी की। एमबीए करने के कुछ दिनों बाद उन्हें विष्‍णु प्रिया इंडस्ट्रीज में नौकरी मिली। यह कंपनी ताजी सब्जियों का व्यापार करती थी।

यह वह समय था जब शॉपिंग मॉल नहीं हुआ करते थे‌ और सब्जियों के लिए कोई आधुनिक बाजार नहीं थे। यह कंपनी सब्जियों को साफ सुथरे ढंग से बाजार में बेचती थी। चूंकि नितिन एक किसान परिवार से था इसलिए उसे कंपनी का यह काम बहुत जचा।

साझीदार से लगा घाटा तो फिर की नौकरी

इस काम में उन्हें साढ़े तीन बजे उठकर ट्रक से सब्जी अनलोड करानी होती और फिर दिन में उसे काट-छांटकर धोना होता। दोपहर बाद उसे अपनी कंपनी के नाम के लिफाफों में पैक करते जो शाम को बिकती।

इसी बीच उनके एक परिचित ने इस काम में पांच लाख रुपए लगाए और साझीदार बन गए। साझीदार होने के बाद नितिन को पता चला कि इससे उसे कोई खास मुनाफा नहीं हो रहा तो कुछ दिन बाद उसने सब्जी का धंधा बंद कर दिया।

नितिन एक बार फिर से एक गैस कंपनी में नौकरी करनी शुरू की। कुछ साल तक नितिन नौकरी करके फिर से पूंजी जमा की और नौकरी छोड़ दी। नितिन 31 दिसंबर 1999 में एक्सेल गैस इक्विपमेंट्स नाम की कंपनी शुरू की। आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 25 करोड़ रुपए है और 150 से ज्यादा परमानेंट कर्मचारी हैं।

Source : amarujala
  • 23
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com