एक मजदूर ने खड़ा कर दिया 1600 करोड़ का साम्राज्य Biography Of Sudip Dutta

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एक मजदूर ने खड़ा कर दिया 1600 करोड़ का साम्राज्य Biography Of Sudip Dutta

“गरीब सपने तो सजाते है पर क्या उन सपनो को वे पूरा कर पाते है? ऐसी ही एक कहानी है “Sudip Dutta” की जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत के जरिये एक नया मुकाम हासिल किया| इन्होने कामयाबी को वो ऊंचाई दी है की देखते ही देखते 1600 करोड़ की कंपनी अपने बलबूते पर खड़ा कर दिया”

परिचय :-

Sudip Dutta का जन्म पश्चिम बंगाल स्थित दुर्गापुर में सन 1972 में हुआ था | सुदीप के पिताजी आर्मी में थे लेकिन 1970 में सुदीप के पिताजी घायल होने के कारण घर पे रहते थे और उनका बड़ा भाई ही घर की देख रेख करता था, अचानक उनके बड़े भाई कि तबियत ख़राब हो गई और आर्थिक तंगी से इलाज न करा पाने के कारण उनके भाई कि मृत्यु हो गई और इसी शोक से कुछ दिन बाद उनके पिताजी कि भी मृत्यु हो गई | सुदीप के ऊपर घर कि अब सारी जिम्मेदारी आ गई, उन्हें अपनी माँ के साथ-साथ और सारे भाई बहनो को भी देखना पड़ता था।

कामयाबी का अनोखा सफर :

सुदीप के कुछ मित्रो ने उन्हें मुंबई जाने कि सलाह दी ताकि वे अपने परिवार के लिए पैसा कमा सके और उनकी देख भाल कर सके | ये सलाह काम आई और वे मुंबई चले गए, वहां उन्हें मजदूरी के 15 रुपए मिलते थे, और मजदूरों के बीच सोना पड़ता था |

सुदीप के जीवन में एक नया मोड़ तब आया जब वे बेरोजगार हो गए, क्योकि जिस कंपनी में वे काम करते थे वो बंद हो गया था |

सुदीप कि सोच साधारण लोगो से थोड़ी अलग ही है, जो उन्हें आज कामयाब बना दिया , 2 साल तक मजदूरी का काम करने के बाद अपनी जमा पूंजी इकट्ठा करके और कुछ दोस्तों से उद्धार लेकर उन्होंने उसी फैक्ट्री को खरीद लिया जहा वे काम करते थे | उन्होंने अपने मालिक को मुनाफा देने का वादा करके उस फैक्ट्री को खरीद लिया |

नई सोच और अनोखा अंदाज :

सुदीप की सोच अनोखी थी, केवल नौकरी करना उनकी ख्वायिश नहीं थी बल्कि दुसरो से अलग सोच उन्हें दुनिया से अलग बनती है | सुदीप की कंपनी का नाम “Ess Dee Aluminium Ltd” था | नई कंपनी के 7 मजदूरों के साथ उन्होंने एल्युमीनियम पैकजिंग का काम शुरु किया | उस वक़्त जिंदल कंपनी बाजार में थी और बड़ी कंपनियों को टक्कर देना सच मे सुदीप के लिए एक चुनौत्ती का काम था |

सुदीप कड़ी मेहनत और लगन से अपना उत्पादन बढ़ाते गए, मेहनत तो तब रंग लाई जब सुदीप को बड़ी कम्पनिया जैसे Sun Pharma, Cipla और Nestle जैसी कंपनियों से आर्डर मिलना शुरु हो गए।

चुनौतियो का सामना :

सुदीप कामयाबी की सीढी चढ़े ही थे की अनिल अगरवाल की “Vedanta” जैसी कंपनी बाजार मे आ गई लेकिन सुदीप ने हार न मानी अच्छी उत्पाद बढ़ाके वेदांत जैसी कंपनी को भी पीछे छोड़ दिया | अंत में अनिल अग्रवाल को अपनी कंपनी सुदीप को बेचने पड़े | इंसान मेहनत और अच्छी बुद्धि से क्या कुछ नहीं कर सकता ये बात सुदीप ने आखिर साबित कर दिया की लाख मुश्किलों का सामना करना पड़े लेकिन इरादे अगर अच्छे और कुछ कर जाने की भावना अगर इंसान मे हो तो वो किसी भी परिस्थिति से लड़ सकता है।

Source : achhipost

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